सच बात से सुप्रीम कोर्ट की बेज्जती होती है साधो?

साधो, आज सुप्रीम कोर्ट ने मिड डे अखबार के पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट की बेज्जती का अपराधी ठहरा दिया।  क्या बेज्जती की थी इन चार पत्रकारों ने? ये कि इन्होने छापा था कि किस किस तरह से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य (अ) न्यायाधीश ने अपने कपूतों को फायदा पहुंचाने के लिये फैसले दिये।

दिल्ली के सीलिंग के कोहराम में जब छोटे मोटे दुकानदार आत्महत्यायें कर रहे थे तो सब्बरबाल के कपूत करोड़ों की कमाई काट रहे थे। इनकी करोड़ों की कमाई की दुकान सब्बरबाल के सरकारी घर से ही चल रही थी। 

ये सब छापा था मिड डे के चार  पत्रकारों ने। अब सुप्रीम कोर्ट कहता है कि उसकी ये सब छापने से बेज्जती हो गयी।

ये सब्बरबाल कहता है कि उसके बाल बच्चे उसके घर में क्या कर रहे थे उसे कुछ भी नही मालूम।  बड़ा भोला बलम है। मगर साधो, सब जानते हैं कि ये भोला बलम कितना बल्लम हैं। 

साधो ये पंच किसलिये कुर्सी पर जमे हैं? सच्चाई पर परदा डालने के लिये या अपनी बेज्जती का हंटर दिखा कर सच्चाई को ताले में बंद करने के लिये?

  दास कबीर सुप्रीम कोर्ट के पंचों से कहता है कि सच से बेज्जती नहीं होती। सच तो सुरज के समान है। इसकी रौशनी पर तुम ताला नहीं डाल सकते। आंख मींच कर तुम भले ही शुतुरमुर्ग बन जाओ पर ये पब्लिक है सब जानती है और तुम्हारे पैरों की जमीन भी एकदिन पलट डालेगी। 

दास कबीर मिडडे के बहादुर पत्रकार एस.के. अख्तर, वितुषा ओबराय, इरफान खान और एम.के. तायल को सलाम करता है और सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश आर एस सोढी और बीएन. चतुर्वेदी को समझायश देता है अदालत की बेज्जती के नाम पर सच को ताले में बन्द न करें।

  

दीपक प्रहलाद का सपना न टूट जाये.

साधो,  आज हिन्दुस्तान टाइम्स में मनोज शर्मा की लिखी रपट पढ़ो? देखो एक दस साल का दीपक प्रहलाद है जो कूड़ा करकट बीनबान कर 30-40 रुपये रोज कमाता है, चुंगी के स्कूल में पढ़ता है और आंखों में डाक्टर बनने का सपना पाले हुये है. उसे मालूम है कि इस सबके के लिये उसे बहुत रुपया चाहिये. वो दीपक अपने पैसे एक बैंक में जमा कर रहा है.

कैसी बैंक में? ये बैंक पुरानी दिल्ली फतेहपुरी रेलवे स्टेशन के पास है., नाम है बाल बिकास बैंक. इसे बच्चे मिलकर चलाते हैं, जिसका मनीजर 15 साल का छोकरा है. अकाउन्टेन्ट 13 साल का है. इस बैंके में जहा ढेर सारे दीपक जल जल कर रुपया पैसा कमा कर लाते है, मेहनत मजूरी कर के और अपने कल के सपनों के लिये बचाते हैं.

बोलो साधो, तुम क्या कहते हो इस खबर पर?
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हरी भई बनराइ

कबिरा बादल प्रेम का, हम परि बर्ष्या आइ
अंतरि भीजी आत्मा, हरी भई बनराइ

साधो, प्रेम के बादल में भीगो.  तुम्हारे अंदर की आत्मा, तक इससे भीग जायेगी.
तुम अभी ज्ञान पोथी की जो बातें कर रहे हो, वो सब भूल जाओगे.

तुम कहते तो रोमिल्ला थापर ने ये कहा था!
तुम कहते हो कि आर्य फलां जगह से आये थे!
तुम कहते हो हिन्दू जैन बोद्ध ये नहीं वो हैं!

साधो, इतिहास के मुरदे के साथ कब तक बलात्कार करते रहोगे ? अरे भूल जाओ इन सबको और आज की बात करो.

गये गुजरे जमाने के पीछे तो वो लोग चिपकते हैं जिनका वर्तमान मर चुका होता है.  जो इतने अशक्त हो चुके होते हैं कि कुछ भी करने के काबिल नहीं होते.  क्या तुम इतने अशक्त हो?

आज की बात करो, प्यार की बात करो.

धरम की बात तो वो करते हैं जिनके पास करने को कोई काम नहीं होता.  पेट में रोटियां होती है, जेब में पैसे.  भूखे आदमी का कोई धरम नहीं होता.  साधो, ये भरे पेट की उछल कूद है. चलो अपना अपना चरखा उठाओ, की बोर्ड उठाओ और बुनाई शुरू करो.  अपने अपने औजार खटखटाओ.

अपनी अन्तरआत्मा को भिगो डालो, और देखो कैसे हरियाते हो.

कबिरा बादल प्रेम का, हम परि बर्ष्या आइ
अंतरि भीजी आत्मा, हरी भई बनराइ

साधो देखो जग बौराना!

साधो, इस ब्लाग की दुनिया में भी कबीर की पिछली दुनिया की तरह के ही लोग हैं   एक दूसरे से झगड़ने वाले, मार कुटाई करने वाले, ऊधम दंगा करने वाले

कबीर ने पहले भी इनके खिलाफ चेताया था, आज भी चेतायेगा

साधो, इन बौराये लोगों से बचकर रहना