साधो, आज हिन्दुस्तान टाइम्स में मनोज शर्मा की लिखी रपट पढ़ो? देखो एक दस साल का दीपक प्रहलाद है जो कूड़ा करकट बीनबान कर 30-40 रुपये रोज कमाता है, चुंगी के स्कूल में पढ़ता है और आंखों में डाक्टर बनने का सपना पाले हुये है. उसे मालूम है कि इस सबके के लिये उसे बहुत रुपया चाहिये. वो दीपक अपने पैसे एक बैंक में जमा कर रहा है.
कैसी बैंक में? ये बैंक पुरानी दिल्ली फतेहपुरी रेलवे स्टेशन के पास है., नाम है बाल बिकास बैंक. इसे बच्चे मिलकर चलाते हैं, जिसका मनीजर 15 साल का छोकरा है. अकाउन्टेन्ट 13 साल का है. इस बैंके में जहा ढेर सारे दीपक जल जल कर रुपया पैसा कमा कर लाते है, मेहनत मजूरी कर के और अपने कल के सपनों के लिये बचाते हैं.

July 15, 2007 at 5:04 am
आपकी चिंता वाजिब है।
July 15, 2007 at 6:09 am
बहुत नयी जानकारी है। सच मे बहुत सराहनीय काएय कर रहे हैम ये बच्चें।
July 15, 2007 at 6:10 am
सच मे बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं ये बच्चें।
July 15, 2007 at 9:29 am
कुछ सीख लेना चाहिये इनसे
September 1, 2007 at 10:27 am
लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld