दीपक प्रहलाद का सपना न टूट जाये.

साधो,  आज हिन्दुस्तान टाइम्स में मनोज शर्मा की लिखी रपट पढ़ो? देखो एक दस साल का दीपक प्रहलाद है जो कूड़ा करकट बीनबान कर 30-40 रुपये रोज कमाता है, चुंगी के स्कूल में पढ़ता है और आंखों में डाक्टर बनने का सपना पाले हुये है. उसे मालूम है कि इस सबके के लिये उसे बहुत रुपया चाहिये. वो दीपक अपने पैसे एक बैंक में जमा कर रहा है.

कैसी बैंक में? ये बैंक पुरानी दिल्ली फतेहपुरी रेलवे स्टेशन के पास है., नाम है बाल बिकास बैंक. इसे बच्चे मिलकर चलाते हैं, जिसका मनीजर 15 साल का छोकरा है. अकाउन्टेन्ट 13 साल का है. इस बैंके में जहा ढेर सारे दीपक जल जल कर रुपया पैसा कमा कर लाते है, मेहनत मजूरी कर के और अपने कल के सपनों के लिये बचाते हैं.

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साधो देखो जग बौराना!

साधो, इस ब्लाग की दुनिया में भी कबीर की पिछली दुनिया की तरह के ही लोग हैं   एक दूसरे से झगड़ने वाले, मार कुटाई करने वाले, ऊधम दंगा करने वाले

कबीर ने पहले भी इनके खिलाफ चेताया था, आज भी चेतायेगा

साधो, इन बौराये लोगों से बचकर रहना